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अनगढ़ पत्थर : बयान-ए-हकीकत *डॉ.कर्मानंद आर्य वस्तुतः कविता कवि की जीवनदृष्टि और उसके समग्र जीवनानुभव का एक अद्भुत संसार निर्मित करती है. कभी-कभी तो कविता बीहड़ इलाकों में ले जाती है . कवि हीरालाल काव्यालोक का ऐसा ही एक बीहड़ क्षेत्र रचते हैं. उनके कविता संग्रह ‘अनगढ़ पत्थर’ की सम्पूर्ण कवितायेँ बयान-ए-हकीकत ही हैं. यथार्थ के जिस लोक की रचना वे करते हैं वहाँ एक सामान्य कवि का पहुँच पना संभव नहीं है. उनका काव्यलोक वंचना के उस लोक तक जाता है जहाँ आभाव है, पीड़ा है, समाज में फिट न बैठ पाने की बेचैनी है. उनके इलाके कभी निर्जन नहीं होते. उनकी कविता में कलियों के चिटकने से लेकर पत्तियों के झरने तक की आवाजें है दिखाई देती हैं. उनकी कविताओं में हर्ष करूणा क्रोध आवेग सब कुछ अपनी गूँज छोड़ता हुआ दिखाई देता है. हीरालाल की कविताओं से गुजरते हुए यह विश्वास होता है कि सौन्दर्य केवल वहीं नहीं है जो ऊपर से सुन्दर दिख रहा होता है अपितु वे वहाँ भी सुन्दरता ढूंड लेते हैं जहाँ कलाप्रेमियों की दृष्टि थम जाती है. कविता के संसार में सौन्दर्य की खोज वैसे ही है जैसे फूलों के भीतर खुशबू हवा-पानी और क...